AIPMT से NEET तक…नाम बदला, पर पेपर लीक की घटना बरकरार, जानें मेडिकल एंट्रेस एग्जाम का पूरा इतिहास

 

NEET UG 2026 Paper Leak: इस समय पूरे देश में नीट यूजी परीक्षा में पेपर लीक की घटना को लेकर खूब हो-हंगामा मचा हुआ है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब मेडिकल प्रवेश परीक्षा को रद्द किया गया है. इससे पहले साल 2015 में ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट (AIPMT) को भी पेपर लीक की वजह से रद्द किया गया था.



बीते 3 मई को नीट यूजी 2026 परीक्षा का आयोजन किया गया था, लेकिन पेपर लीक की वजह से इस एग्जाम को रद्द कर दिया गया है. अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने नीट यूजी परीक्षा को ‘सिस्टेमैटिक फेलियर’ बताया है और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए (NTA) के खिलाफ ही याचिका दायर कर दी है. FAIMA की मांग है कि अब इस परीक्षा को न्यायिक निगरानी में कराई जाए. देशभर में हुई इस परीक्षा में 22 लाख से अधिक कैंडिडेट्स शामिल हुए थे. हालांकि एनटीए ने अभी तक ये नहीं बताया है कि दोबारा नीट यूजी परीक्षा का आयोजन कब किया जाएगा.

यह पहली बार नहीं है जब नीट परीक्षा में पेपर लीक के आरोप लगे हैं बल्कि पहले भी इस मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट में अनियमितताओं और पेपर लीक होने के आरोप सामने आए हैं, लेकिन ये पहली बार है कि एनटीए ने पूरी परीक्षा ही रद्द कर दी है. इससे पहले साल 2024 में नीट यूजी परीक्षा के पेपर लीक होने के आरोप लगे थे. सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में परीक्षा के प्रश्नों के लीक होने का दावा किया गया था, जबकि एनटीए ने इन आरोपों का खंडन किया था. हालांकि इस मामले में बिहार के पटना में पुलिस ने चार परीक्षार्थियों समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन्होंने कथित तौर पर पेपर पहले से प्राप्त करने के लिए लाखों रुपये की रिश्वत दी थी.

2024 में उठी थी NEET परीक्षा रद्द करने की मांग

साल 2024 में भी नीट यूजी परीक्षा का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था और देशभर में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे, जिसमें परीक्षा रद्द करने और दोबारा परीक्षा कराने की मांग उठाई गई थी. हालांकि कोर्ट ने इस मामले में अपने फैसले में कहा था कि छिटपुट घटनाओं के अलावा किसी ‘सिस्टेमैटिक फेलियर’ का कोई सबूत नहीं है. ऐसे में कोर्ट ने बड़े पैमाने पर नीट यूजी 2024 परीक्षा के पेपर लीक होने के दावों को भी खारिज कर दिया था और अनियमितताओं के विश्वसनीय सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए दोबारा परीक्षा का आदेश देने से इनकार कर दिया था.


देश में पहली बार कब हुई थी NEET परीक्षा?

भारत में पहली बार नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी NEET परीक्षा 5 मई 2013 को आयोजित की गई थी. इससे पहले ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट (AIPMT) नाम की राष्ट्रीय स्तर की पेन-एंड-पेपर मोड में प्रवेश परीक्षा होती थी, जिसे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई (CBSE) द्वारा देश में MBBS और BDS में एडमिशन के लिए आयोजित किया जाता था. हालांकि बाद में यानी साल 2019 में नीट परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए (NTA) को दे दी गई.

AIMPT को NEET से क्यों बदला गया?

नीट (NEET) की शुरुआत से पहले छात्रों को कई राज्य स्तरीय मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में भाग लेना पड़ता था. इससे छात्रों के साथ-साथ परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं पर भी आर्थिक और मानसिक दबाव पड़ता था. इसके अलावा परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी और राज्यों में एक समान परेशानी के कारण अनुचित रिजल्ट आते थे. परीक्षा की इसी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) और भारत सरकार ने 2013 में NEET की शुरुआत की, जिसके बाद पूरे भारत में छात्रों के लिए एक ही मेडिकल प्रवेश परीक्षा हो गई.

AIMPT में भी हुआ था पेपर लीक

ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट (AIPMT) का आयोजन आखिरी बार साल 2015 में किया गया था, लेकिन पेपर लीक के कारण सुप्रीम कोर्ट ने इस परीक्षा को रद्द कर दिया था. इसके बाद दोबारा AIPMT परीक्षा 25 जुलाई 2015 को आयोजित की गई थी. रद्द होने से पहले एआईपीएमटी परीक्षा 3 मई को देश भर के 1,050 केंद्रों पर आयोजित की गई थी. बाद में आई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि 15-20 लाख रुपये के बदले में 90 आंसर-की इलेक्ट्रॉनिक रूप से उम्मीदवारों को लीक कर दी गई थी. इस मामले में कई डॉक्टरों और एमबीबीएस छात्र को भी गिरफ्तार किया गया था. इसी घटना के बाद से AIPMT को NEET में बदल दिया गया था.

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