आतंकी को बताया शहीद और अलगाववादी को स्वतंत्रता सेनानी…जम्मू-कश्मीर की स्कूली किताब पर विवाद

जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जा रही एक किताब को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. आरोप है कि किताब में आतंकी मकबूल भट्ट को 'शहीद' और कुछ अलगाववादी नेताओं को 'स्वतंत्रता सेनानी' बताया गया है. मामले के सामने आने के बाद विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच, विवादित सामग्री हटाने तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है.

जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जा रही एक किताब को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. आरोप है कि समग्र शिक्षा के तहत छात्रों को उपलब्ध कराई गई इस किताब में आतंकी मकबूल भट्ट को ‘शहीद’ और कुछ अलगाववादी नेताओं को ‘स्वतंत्रता सेनानी’ बताया गया है. मामला सामने आने के बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है. जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम (JKPF) ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि किताब में इतिहास को तथ्यों के विपरीत प्रस्तुत किया गया है.

संगठन ने विवादित सामग्री को तत्काल सिलेबस से हटाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. इस मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने भी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि किसी भी किताब को सरकारी स्कूलों के सिलेबस में शामिल करने से पहले एक निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाती है. ऐसे में अगर यह पुस्तक छात्रों को पढ़ाई जा रही है तो इसे केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं माना जा सकता.

उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग

सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि यह सरकार की मंशा को दर्शाता है. उनके अनुसार, अगर विवादित सामग्री वाली कितब को मंजूरी देकर स्कूलों तक पहुंचाया गया है तो इससे यह संदेश जाता है कि सरकार अलगाववादी नेताओं और आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों का महिमामंडन करने वाली सामग्री को बढ़ावा दे रही है. उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.

किताब पर घमासान, शिक्षा विभाग और सरकार पर उठे सवाल

विवाद बढ़ने के बाद शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताबें तथ्यात्मक, निष्पक्ष और राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप होनी चाहिए. फिलहाल इस मामले पर सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है. वहीं, विवादित को लेकर जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है.


 

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